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PCOS: पीसीओएस क्या है? जानिए इसके संकेत, लक्षण, कारण और बचाव के उपाय सहित पूरी जानकारी

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को आमतौर पर पीसीओएस के नाम से जाना जाता है। जो एक ऐसी हार्मोनल स्थिति है, जिसके बारे में महिलाओं से जुड़े हेल्थ जरनल और लाइफस्टाइल मैग्जीन में सबसे अधिक और मुखर होकर बताया जाता है। आपने अगर इससे जुड़े आंकड़े देखे होंगे, तो आपको ये बात जरूर पता होगी कि हर दस में से एक महिला या करीब 11 फीसदी आज पीसीओएस से जूझ रही हैं। लेकिन वास्तविक स्थिति आखिर क्या है?

रियो पर इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं!

PCOS meaning in Hindi: पीसीओएस को पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर से अधिक गंभीर माना जाता है। पीसीओएस में महिलाओं के शरीर में पुरुष यानी मेल हार्मोन या एण्ड्रोजन सामान्य से अधिक स्तर में पाया जाता है। जिसके कारण मरीज को कई गंभीर परेशानियों से जूझना पड़ता है। उनके अंडाशय में अप्राकृतिक वृद्धि (सिस्ट यानी गांठ) का अनुभव हो सकता है, शरीर के दूसरे हिस्सों पर बाल तेजी से बढ़ते हैं, त्वचा का रंग काला पड़ जाता है और गर्भवती होने में कठिनाई हो सकती है। अगर वक्त रहते बीमारी पर ध्यान ना दिया जाए, तो पीसीओएस के कारण वजन बढ़ सकता है और लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मधुमेह या दिल की बीमारी हो सकती है।

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पीसीओएस का स्तर अध्ययन में शामिल लोगों और निदान के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों के आधार पर 3.7 से 22.5 प्रतिशत तक पाया गया है। अध्ययन से यह भी निष्कर्ष निकला कि पीसीओएस की स्थिति और लोगों की जीवनशैली का आपस में लिंक जुड़ा होता है। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं की संख्या देखें तो पता चलता है कि ग्रामीण से अधिक शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं इससे पीड़ित हैं। मुंबई में किए गए अध्ययन में भी ठीक यही बात सामने आई। हालांकि पेपर के पीयर-रिव्यू में एक रीडर ने कहा कि शहरी इलाकों में इससे पीड़ित महिलाओं की संख्या इसलिए भी अधिक हो सकती है क्योंकि यहां बेहतर चिकित्सा सुविधाएं हैं और डॉक्टरों के बीच अधिक जागरुकता है।

अध्ययनों में ये भी पता चला कि पीसीओएस ज्यादातर महिलाओं को उनके प्रसव के वर्षों में प्रभावित करता है यानी आमतौर पर तब जब वो युवावस्था में होती हैं। हालांकि कई मामलों में देखा गया है कि महिलाएं जीवन के दूसरे चरणों यानी युवावस्था के बाद (यहां तक कि गर्भावस्था के बाद भी) पीसीओएस से जूझ रही होती हैं, जो कि असामान्य बात नहीं है। लेकिन ये दुख की बात है कि इस विषय पर जागरूकता कम है और विकासशील देशों में माता-पिता के बीच निरक्षरता के कारण कई युवा महिलाएं (70 फीसद तक) जो पीसीओएस से पीड़ित हैं, उन्हें लंबे समय बाद भी इसका अहसास ही नहीं हो पाता है। आमतौर पर जब वे गर्भ धारण करने की कोशिश करती हैं, तो उन्हें बांझपन की समस्या से जूझना पड़ता है।

पीसीओएस/PCOS का पूरा इतिहास क्या है?

PCOS kya hota h और इसके पीछे का इतिहास: पीसीओएस कोई नई स्थिति नहीं है। इसके लक्षणों को पहली बार 1721 में इटली के चिकित्सक एंटोनियो वालिसनेरी ने बताया था और उसके बारे में लिखा भी था। इस स्थिति पर किया गया पहला अध्ययन अमेरिकी शोधकर्ता फ्रीलर स्टीन और माइकल लेवेंथल ने लगभग 85 साल पहले "अमेनोरिया एसोसिएटिड विद पॉलीसिस्टिक ओवरीज" नामक एक पेपर में किया था। अब भी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम पर रिसर्च चलती रहती हैं। स्टीन और लेवेंथल के बाद भी पीसीओएस पर हजारों अध्ययन हुए हैं। अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार 1950 और 2000 के बीच के 50 वर्षों में इस विषय पर 8,000 से अधिक पब्लिकेशन देखे गए हैं, जबकि 21वीं सदी के पहले 15 वर्षों में 20,000 से अधिक पब्लिकेशन हुए हैं।

पीसीओएस/PCOS के कारण क्या हैं?

हजारों की संख्या में शोध होने के बावजूद भी पीसीओएस के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। वैसे पीसीओएस के लक्षण परिवारों में पहले भी पाए जाते रहे हैं, इसलिए ऐसा माना जाता है कि इसके लक्षण कम से कम किसी स्तर पर एक या अधिक जीन्स के उत्परिवर्तन के कारण दिखते हैं। अमेरिकन डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज के अध्ययन के मुताबिक, पीसीओएस आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों के संयोजन के कारण होता है, जो गर्भ की केमिस्ट्री को प्रभावित कर सकते हैं।

हम अब तक यही मानते आ रहे हैं कि पॉलीसिस्टिक ओवरी  सिंड्रोम मोटे तौर पर शरीर में एण्ड्रोजन और इंसुलिन के स्तर से संबंधित होता है। PCOS in Hindi और इसके पीछे के कारण जानें

  1. एण्ड्रोजन के उच्च स्तर को मेल (पुरुष) हार्मोन कहा जाता है, टेस्टोस्टेरोन जैसे एण्ड्रोजन प्रजनन ट्रैक्ट, हड्डी, गुर्दे, लीवर और मांसपेशियों सहित कई महत्वपूर्ण अंगों के कार्य को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। वे ऐसे कई परिवर्तनों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं, जो महिलाओं के शरीर में युवावस्था में हो सकते हैं, जैसे अंडरआर्म में बालों का बढ़ना। जब ये मेल हार्मोन सामान्य स्तर से अधिक बढ़ जाते हैं तो वे अतिरिक्त बालों के विकास, मुंहासे सहित दूसरी समस्याओं का कारण बनते हैं। यह ओव्यूलेशन के समय अंडाशय का अंडा जारी करने से रोक सकते हैं।
  1. इंसुलिन का उच्च स्तर- पीसीओएस से पीड़ित कई महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंसी का पता चला है, जो एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सामान्य रूप से प्रतिक्रिया करने में विफल हो जाती हैं, जिससे टाइप -2 मधुमेह जैसी बीमारी हो सकती है। इंसुलिन हार्मोन का काम ये नियंत्रित करना होता है कि आप जो खाना खाते हैं वह कैसे ऊर्जा में परिवर्तित होता है और शरीर की दैनिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है। पीसीओएस वाली महिलाएं, जिनमें इंसुलिन कम हो जाता है, वह आमतौर पर खाने की गलत आदतों और अनियमित शारीरिक गतिविधि के कारण अधिक वजन वाली और मोटापे से पीड़ित पाई जाती हैं।

पीसीओएस/PCOS का उपाय क्या है?

यदि आप pcos meaning in Hindi के बारे में जान गए हैं, तो अब हम इसका समाधान देखेंगे।

साल 1935 में स्टीन और लेवेंथल ने पीसीओएस को एक ऐसी स्थिति बताया था, जिसमें कई महिलाओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) में गड़बड़ी, हिर्सुटिज्म और कई छोटे फॉलिक्ल्स के साथ बढ़े हुए अंडाशय जैसे सामान्य लक्षण दिखते हैं। समय के गुजरने के साथ ही अल्ट्रासाउंड इमेजिंग जैसी नई तकनीकें आ गई हैं और अंडाशय की गाठों (सिस्ट) का बारीकी का आसानी से पता लगाना आसान हो गया है। इस तकनीक से पीसीओएस के उपाय के तौर पर एक सफलता भी मिली है, साथ ही पीसीओएस का निदान भी हो पा रहा है। कई महिलाओं  को अन्य स्थितियों के कारण गांठें थीं, जिनका पीसीओएस का निदान किया गया है। इसमें कोई अन्य लक्षण नहीं होने के बावजूद (जैसे एण्ड्रोजन का उच्च स्तर या शरीर के बालों का अधिक विकास) ऐसी स्थिति पाई गई। कई देशों में विशेष रूप से एशियाई और अफ्रीकी देशों में, यह पीसीओएस की स्थिति अभी भी कायम है। पीसीओएस की स्थिति में ओवरी यानी अंडाशय बढ़ने लगते हैं। उसके कारण एग के चारों ओर फॉलिकल की संख्या बढ़ने लग जाती है और ओवरी ठीक से काम नहीं कर पाती। मोटे लोगों में समस्या और अधिक गंभीर हो जाती हैं।

साल 2003 में नीदरलैंड के रॉटरडैम में आयोजित एक कार्यक्रम में रॉटरडैम क्राइटीरिया (मानदंड) के रूप में एक निर्धारित मानदंड तैयार किया गया था, जिसका आज तक दुनियाभर में पालन किया जा रहा है। इस रॉटरडैम मानदंड के अनुसार, पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम के उपाय के लिए एक मरीज को इनमें से कम से कम तीन चीजें दिखनी चाहिए।

  • अनियमित या अनुपस्थित ओव्यूलेशन,
  • एंड्रोजेनिक हार्मोन का ऊंचा स्तर,
  • बढ़े हुए अंडाशय, जिनमें प्रत्येक में कम से कम 12 फॉलिकल्स होते हैं।

पीसीओएस का इलाज करने के लिए कोई एक टेस्ट मौजूद नहीं है। तो ऐसे में दूसरी स्थितियों से इंकार करने और पीसीओएस के इलाज पर निर्णायक रूप से पहुंचने के लिए आपको डॉक्टर से कई बॉडी और मेडिकल टेस्ट करने पड़ सकते हैं। इसमें संभावित रूप से ये शामिल होंगे-

  1. शारीरिक टेस्ट- जहां डॉक्टर आपके बीएमआई, रक्तचाप, कमर के आकार की जांच करते हैं और आपके चेहरे, छाती, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर अतिरिक्त बालों का पता लगाते हैं। इस टेस्ट में मुंहासे, त्वचा का डिस कलर होना और कुछ अन्य आंतरिक लक्षणों जैसे बढ़े हुए थायरॉयड ग्रंथियों की भी जांच होती है।
  2. पैल्विक टेस्ट- इसमें डॉक्टर मेल हार्मोन के लक्षणों का पता लगाने के लिए एक अल्ट्रासाउंड करते हैं। इससे बढ़े हुए क्लिटोरिस या बढ़े हुए अंडाशय जैसे शारीरिक लक्षणों की उपस्थिति का पता लगता है।
  3. पैल्विक अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राम- इसमें डॉक्टर और लैब तकनीशियन आपके अंडाशय में सिस्ट यानी गांठों की जांच करने के लिए साउंड वेव्स का उपयोग करते हैं और अप्राकृतिक वृद्धि का पता लगाने के लिए गर्भाशय की परत (एंडोमेट्रियम) की जांच करते हैं। यह आमतौर पर हमेशा पीसीओएस की पुष्टि के लिए किया जाता है।
  4. ब्लड टेस्ट- इसका उपयोग शरीर में मेल हार्मोन के स्तर की जांच के लिए किया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ नियंत्रण में है। ब्लड टेस्ट थायराइड रोग, कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन के बारे में भी जानकारी देता है। साथ ही उस हार्मोन के बारे में भी बताता है, जिसका उत्पादन और प्रभावशीलता का असर पीसीओएस पर पड़ सकता है।

पीसीओएस/PCOS के सामान्य लक्षण

PCOS kya hota hai और इसके सामान्य लक्षण क्या हैं? पीसीओएस महिला के अंडाशय के कार्य करने को प्रभावित करता है, जो हर महीने एक अंडे के फर्टिलाइजेशन के लिए पुरुष और महिला दोनों हार्मोन तैयार करता है। महिला हार्मोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन मासिक धर्म चक्र यानी पीरियड्स को नियंत्रित करते हैं, जबकि पुरुष हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन, शरीर के अन्य कार्यों को नियंत्रित करता है। हर महीने ओव्यूलेशन नामक प्रक्रिया में अंडाशय गर्भाशय में एक स्पर्म द्वारा फर्टिलाइज होने के लिए अंडे छोड़ती है। अगर फर्टिलाइजेशन नहीं होता, तो गर्भाशय की परत (एंडोमेट्रियम) फट जाती है, जिसके परिणामस्वरूप पीरियड्स होते हैं।

पीसीओएस/PCOSइस प्रक्रिया को इन तरीकों से प्रभावित करता है-

  1. अंडाशय में सिस्ट (गांठ) बनती हैं, जिसके कारण मेल (पुरुष) हार्मोन के उच्च स्तर का उत्पादन होता है और ओव्यूलेशन के चक्र में रुकावट आती है। ये थैली प्रभावी रूप से द्रव से भरे कूप होते हैं, जिनमें से प्रत्येक एक अपरिपक्व अंडा जारी करता है, जो कभी भी ओव्यूलेशन को रोकने के लिए पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होता। 'पॉलीसिस्टिक' शब्द इसी से निकला है, यानी अंडाशय में कई सिस्ट की उपस्थिति होना।
  2. ओव्यूलेशन की कमी के कारण, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन और फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन जैसे हार्मोन का स्तर बदल जाता है, जबकि एण्ड्रोजन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इन हार्मोनल परिवर्तनों के कारण पीसीओएस से पीड़ित महिलाएं लंबे समय तक ओव्यूलेशन का अनुभव करती हैं। कुछ महिलाओं को साल में आठ से कम बार पीरियड्स हो सकते हैं। जैसे-जैसे गर्भाशय की परत लंबे समय तक बनी रहती है, वैसे-वैसे आपके मासिक धर्म सामान्य से अधिक हो सकते हैं।

पीसीओएस/PCOS के सबसे आम लक्षण ये हैं-

  • ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में रुकावट के कारण अनियमित पीरियड्स होना।
  • गर्भाशय की परत के निर्माण के कारण भारी रक्तस्राव होना।
  • बालों का बढ़ना यानी हिर्सुटिज्म होना, जिसके कारण महिलाओं को अपनी पीठ, पेट, छाती और चेहरे पर बालों के बढ़ने का अनुभव होता है।
  • पुरुष हार्मोन के कारण मुंहासे, तैलीय त्वचा और चेहरे, छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से पर मुंहासे निकल आते हैं।
  • त्वचा का काला पड़ना और गर्दन, कमर के क्षेत्र और स्तनों के नीचे काले धब्बे होना।
  • शरीर में इंसुलिन के स्तर में बदलाव के कारण वजन बढ़ना।
  • पुरुष की तरह गंजापन होना।
  • सिरदर्द और कुछ मामलों में माइग्रेन होना।

पीसीओएस/PCOS के कारण होने वाली समस्याएं-

PCOS kya hai और पीसीओएस के कारण क्या समस्याएं हो सकती हैं? पीसीओएस और शरीर में उच्च मेल हार्मोन के कारण महिलाओं को कई समस्याएं हो सकती हैं. जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  1. बांझपन: पीसीओएस ओव्यूलेशन या अंडाशय से एग रिलीज को प्रभावित करता है। चूंकि एग की रिलीज बाधित होती है इसलिए फर्टिलाइजेशन और गर्भाधान करना मुश्किल हो जाता है।
  2. स्लीप एपनिया: पीसीओएस से रात में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है, जिससे नींद बाधित हो सकती है। यह मोटापे से पीड़ित महिलाओं में विशेष रूप से आम समस्या है।
  3. मेटाबोलिक संबंधी दिक्कतें: पीसीओएस से पीड़ित लगभग 70% महिलाएं अधिक वजन वाली होती हैं। ऐसे में उनमें हाई ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप, कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल और उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं दिख सकती हैं। इन सभी स्थितियों की जांच एक साथ नहीं की गई, तो मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
  4. एंडोमेट्रियल कैंसर: लंबे समय तक ओव्यूलेशन से गर्भाशय की परत (एंडोमेट्रियम) मोटी हो सकती है। जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
  5. मानसिक बीमारी: अनचाहे बालों का बढ़ना, अनियमित हार्मोन, सोने में असमर्थता और वजन बढ़ना, ये सब डिप्रेशन और चिंता का कारण बनते हैं। पीसीओएस से पीड़ित कई महिलाएं यह समझने में विफल रहती हैं कि इन सबमें उनकी कोई गलती नहीं है। ऐसे में उन्हें मानसिक तौर पर सहायता की जरूरत पड़ जाती है

अन्य समस्याएं: संभावित गर्भपात, लीवर में गंभीर सूजन और गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव।

पीसीओएस/PCOS में डायट और इलाज क्या होना चाहिए- 

PCOS kya hai और आपको किस डाइट का पालन करना चाहिए? दुर्भाग्य से ढेरों शोध होने के बावजूद पीसीओएस को ठीक करने के लिए अभी तक कोई व्यापक इलाज नहीं मिला है। आपका डॉक्टर सामान्य रूप से जीवनशैली में बदलाव की बात कह सकता है, जैसे कि व्यायाम के जरिए वजन कम करना और आहार में बदलाव करना। कुछ अध्ययनों के अनुसार, अपने शरीर के वजन का सिर्फ 5% उपयोग करने से मासिक धर्म चक्र को ठीक करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करने और मधुमेह और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

विभिन्न अध्ययनों में पता चला है कि कम कार्ब वाले आहार से इंसुलिन के स्तर को कम करने और वजन घटाने में मदद मिल सकती है। कम ग्लाइसेमिक एसिड और अधिक आयरन वाला आहार वजन घटाने में बेहतर काम आ सकता है। इस बीच 30 मिनट का व्यायाम भी ओव्यूलेशन को नियमित करने और उन हिस्सों से वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, जहां समस्या आ रही है।

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