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इस गाइड में जानिए पीसीओडी के कारण, संकेत, लक्षण, और इलाज

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क्या आपको पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हुआ है और आप सोच रहे हैं कि इससे कैसे निपटा जाए? क्या आप पीसीओडी को लेकर गूगल पर सर्च कर रहे हैं और तमाम बार सर्च करने के बावजूद, उनसे आपको कुछ मदद नहीं मिल रही है? ये सर्च अकसर पीसीओएस की ओर ले जाती हैं? जैसे पीसीओडी क्या है? पीसीओएस क्या है? ये कैसे अलग हैं? अगर आपको इतना कुछ करने के बावजूद आखिर में पता नहीं चल सका है कि आखिर पीसीओडी क्या है, तो आप एकदम सही जगह पर आए हैं। यहां हम आपको इससे जुड़ी हर जानकारी विस्तार के साथ देने वाले हैं।

पीसीओडी क्या है?

पीसीओडी क्या है? हर महीने अंडाशय के अंदर एक अंडा परिपक्व होता है और शुक्राणु द्वारा फर्टिलाइज होने की उम्मीद में फैलोपियन ट्यूब के नीचे अपना रास्ता बना लेता है। कभी-कभी ये अंडे पूरी तरह से परिपक्व नहीं होते हैं। अंडाशय में इस तरह के अपरिपक्व या आंशिक रूप से परिपक्व अंडे का निर्माण पीसीओडी या पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग को जन्म देता है। ये अंडे समय के साथ सिस्ट यानी गांठ में बदल सकते हैं। ये कैंसर जैसा लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होता। गांठ आमतौर पर नरम होती हैं और केवल शरीर के हार्मोन के उत्पादन में हस्तक्षेप करती हैं। जिसके बारे में हम इस आर्टिकल में आगे जानेंगे। पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज 12 से 45 साल की उम्र की लगभग 10 फीसदी महिलाओं को प्रभावित करती है। यह आपके मासिक धर्म चक्र को बाधित कर सकती है, गर्भधारण करने की क्षमता को कम कर सकती है और आपकी जीवनशैली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। अगर इसका इलाज ना किया जाए, तो यह  मधुमेह, मोटापा और उच्च कोलेस्ट्रॉल का कारण बन सकता है, जो सभी हृदय रोग का कारण बनते हैं। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि यह एक ऐसी स्थिति है जिस पर आप नियंत्रण कर सकते हैं। इसके इलाज के लिए आपको सही प्लानिंग और जीवन शैली को लेकर जानकारी हासिल करनी होगी।

पीसीओएस और पीसीओडी में क्या अंतर है?

पीसीओडी क्या है?और यह पीसीओएस से कैसे अलग है? ज्यादातर लोग हर समय पीसीओडी और पीसीओएस के बीच कन्फ्यूज हो जाते हैं। ऐसी कई वजह हैं, जो पीसीओएस को पीसीओडी से अलग बनाती है। इस स्थिति वाले लोग बड़ी मात्रा में एंड्रोजन (हमारे शरीर में कम मात्रा में मौजूद पुरुष हार्मोन) के स्राव का अनुभव करते हैं, उनके अंडाशय बढ़े हुए होते हैं, जबकि बांझपन तक हो सकता है और दूसरी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। संक्षेप में कहें तो पीसीओडी की समस्या का कारण हार्मोनल असंतुलन है। पीसीओडी के लक्षणों का सबसे अच्छा इलाज ही इसकी गंभीरता को कम कर सकता है। इसके लिए स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना जरूरी हो जाता है। पीसीओडी के इलाज में समय पर निदान भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। दूसरी ओर, पीसीओएस का संबंध एंडोक्राइन सिस्टम की खराबी से होता है। ये वो सिस्टम है, जो हमारे शरीर में हार्मोन के प्रवाह को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क में हाइपोथैलेमस द्वारा नियंत्रित होता है। जब हाइपोथैलेमस खराब हो जाता है, तो यह शरीर में हार्मोन के स्राव को प्रभावित करता है, जिससे विभिन्न लक्षण पैदा होते हैं जैसे कि सिस्ट (गांठ) का बनना, अनचाहे स्थानों पर बाल उगना और बांझपन की समस्या आना। संक्षेप में भले ही पीसीओडी और पीसीओएस दोनों एक समान लगते हों, लेकिन उनके कारण अलग होते हैं। पीसीओएस अनुवांशिक है और शरीर में कई परिवर्तनों के कारण होता है, जबकि पीसीओडी अधिकतर हार्मोन से जुड़ा हुआ है। पीसीओएस आनुवंशिक हो सकता है, जबकि पीसीओडी जीवन में किसी भी समय विकसित हो सकता है। पीसीओडी का इलाज भी आसानी से हो जाता है।

पीसीओडी के प्रमुख कारण क्या हैं-

“पीसीओडी का लक्षण क्या है?” अब आप यह जानना चाहेंगे। पीसीओडी के सटीक कारणों की तो पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है लेकिन कुछ कारणों का पता चला है, जो कि इस तरह हैं:

  • अंडाशय बहुत अधिक पुरुष हार्मोन, या एण्ड्रोजन का उत्पादन करते हैं। यह हिर्सुटिज्म और मुंहासे की वजह बनता है। हिर्सुटिज्म में चेहरे, छाती, पीठ, पेट और अन्य क्षेत्रों पर बड़ी मात्रा में बाल उगने लगते हैं, जहां महिलाओं के बाल आमतौर पर नहीं होते हैं।
  • देरी या जल्दी पीरियड्स होना: जब महिलाओं को कम उम्र में मासिक धर्म होता है, तो उनके प्रजनन अंग सामान्य से पहले की उम्र में एस्ट्रोजन के संपर्क में आ जाते हैं। यह अचानक परिवर्तन मासिक धर्म चक्र में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे पीसीओडी जैसी बीमारियों का विकास हो सकता है।
  • हार्मोन के अधिक उत्पादन या कम उत्पादन के परिणामस्वरूप हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे पीसीओडी और अन्य बीमारियां हो सकती हैं। यह गलत जीवन शैली या खराब आहार के कारण हो सकता है। यह आमतौर पर हाइपरिन्सुलिनिज्म के साथ अधिक फैट टिशू का कारण बन सकता है। जिससे दूसरी बीमारी हो सकती हैं।
  • प्रदूषण: पीसीओडी का लक्षण क्या है? हम ये बात पहले से ही जानते हैं कि प्रदूषण अधिकतर स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान देता है। यह शरीर में वो स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे भविष्य में पीसीओडी की समस्या हो सकती है।
  • अतिरिक्त इंसुलिन का उत्पादन: जब शरीर में कोशिकाएं इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाती हैं, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। जिसके चलते शरीर में ब्लड शुगर स्तर को नियंत्रित करने के लिए शरीर अधिक इंसुलिन बनाता है। इंसुलिन के स्तर में वृद्धि के कारण एंड्रोजन नाम के पुरुष हार्मोन का उत्पादन होता है। एण्ड्रोजन के स्तर में यह बदलाव ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को कठिन बना देता है।
  • आनुवंशिकता: आनुवंशिकी भी इस बीमारी में योगदान देने वाला कारक है। मां को गर्भकाल के वक्त मधुमेह होना भविष्य में पीसीओडी की समस्या के कारणों में से एक हो सकता है।

वो बड़ी समस्याएं कौन सी हैं, जिनका आप सामना कर सकते हैं?

ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडे के बाहर निकलने को ओव्यूलेशन कहते हैं) करने में असमर्थता पीसीओडी के प्रमुख कारणों में से एक होता है। फॉलिकल में वृद्धि नियमित रूप से होती रहती है। लेकिन असामान्य हार्मोन इसे धीमा कर देता है और ओव्यूलेशन या अंडे की रिलीज को रोकता है।  अगर आप फॉलिकल के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको इस बारे में भी बता देते हैं। अंडाशयी फॉलिकल (यानी ओवेरियन फॉलिकल) तरल से भरी थैली होती है, जो महिलाओं के अंडाशयों में होती है। हर फॉलिकल में एक अपरिपक्व अंडा होता है, जिसे अंडाणु (ऊसाइट) कहते हैं। महिलाओं के मासिक चक्र की शुरुआत में बहुत से फॉलिकल विकसित होना शुरू होते हैं। अगर महिलाएं बांझपन और इसी तरह की दूसरी समस्याओं का सामना करती हैं, तो उन्हें पीसीओडी का जल्दी पता लगा लेना चाहिए।

 पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के कारण मोटापे से जुड़ी दूसरी बीमारियां जैसे उच्च रक्तचाप, हृदय की समस्याएं और मधुमेह का सामना भी करना पड़ सकता है। अगर इलाज नहीं किया जाता है, तो बीमारी के कारण आपके जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। जिसमें एंडोमेट्रियल और स्तन कैंसर के बढ़ते जोखिम के साथ-साथ हृदय रोग भी शामिल है।

पीसीओडी की समस्या की जांच के लिए टेस्ट-

  • लिपिड प्रोफाइल: पीसीओडी क्या बीमारी है ? पीसीओडी के मरीजों में ट्राइग्लिसराइड का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है। इससे पीसीओडी के मरीजों में स्ट्रोक और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
  • रक्त ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर: पीसीओडी के मरीजों का शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है और इस प्रकार मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड शुगर और इंसुलिन का ऊंचा स्तर इंसुलिन प्रतिरोध के कारण मधुमेह की तरफ इशारा करता है।
  • अल्ट्रासाउंड: पेट का अल्ट्रासाउंड या योनि का अल्ट्रासाउंड अंडाशय पर कई सिस्ट (गांठ) की उपस्थिति और उसके बढ़ने का पता लगाने में मदद करता है। पीसीओएस के रोगियों में अंडाशय सामान्य से लगभग5-3 गुना बड़ा हो सकता है।
  • पीसीओडी के रोगियों में मासिक धर्म चक्र की अनियमितताओं के कारण, गर्भाशय की आंतरिक परत लंबे समय तक बनती है। यह गर्भाशय (एंडोमेट्रियल) कैंसर का कारण हो सकता है। अगर पीसीओएस के मरीज को एक साल से अधिक समय से मासिक धर्म में अनियमितता का अनुभव हो रहा है, तो गर्भाशय के कैंसर से बचने के लिए एक ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड किया जाना चाहिए।

पीसीओडी के लक्षण क्या होते हैं-

पीसीओडी क्या बीमारी है? पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम में कई बाहरी लक्षण भी दिखते हैं। ये आमतौर पर होता है, लेकिन सबसे पहले आंतरिक लक्षणों पर ध्यान दिया जाता है। भोपाल में एक फर्टिलिटी क्लिनिक में काम करने वाली लिपिका (बदला हुआ नाम) ने हमें बताया, "ज्यादातर नई दुल्हनें होती हैं, जिन्हें शादी के कुछ महीनों के बाद ससुराल वाले यहां लाते हैं। वो हमसे पूछते हैं, 'वो गर्भवती क्यों नहीं हो रही है?' हम अल्ट्रासाउंड करते हैं और इसका कारण हमेशा एक ही होता है, पीसीओडी या पीसीओएस। पता चला कि लड़की को सालों से अनियमित तौर पर पीरियड्स हो रहे हैं, लेकिन अब जब उसे बच्चा नहीं हो सकता है, तो उसे इलाज मिलता है।"

अकसर अनचाही जगहों पर बाल उगने या वजन बढ़ने जैसी अन्य स्थितियों में ही महिलाएं डॉक्टरों के पास जाती हैं। भले ही ये लक्षण पीरियड्स के अनियमित होने के बाद दिखते हैं, जिनके बाद इलाज किया जाना जरूरी होता है। मुंबई की शिल्पी कहती हैं, "मेरी मां कहती रही हैं कि अनियमित पीरियड्स एक आम चीज है, जो किशोरावस्था के अंत में होता है। मेरा वजन बढ़ता रहा और हमें शादी के लिए एक लड़का खोजने की जरूरत थी, तभी वह आखिरकार स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाने के लिए तैयार हो गईं। तब तक सब ठीक था।"

पीसीओएस के मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं-

  • मुंहासे होना
  • वजन बढ़ना और वजन कम करने में परेशानी आना
  • चेहरे और शरीर पर अतिरिक्त बाल। इससे चेहरे पर घने, काले बाल और छाती, पेट और पीठ पर अधिक बाल हो सकते हैं।
  • सिर पर पतले बाल
  • अनियमित पीरियड्स। कुछ लोगों को पीरियड्स नहीं होते, साल में कम बार होते हैं। तो वहीं कुछ को माहवारी के दौरान अधिक ब्लीडिंग होती है और दर्दनाक ब्लीडिंग का सामना करना पड़ता है।
  • प्रजनन संबंधी समस्याएं। पीसीओडी की समस्या वाली कई महिलाओं को ओव्यूलेशन की समस्या के कारण गर्भवती होने में परेशानी होती है।
  • डिप्रेशन और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं पीसीओडी के प्रमुख लक्षणों में से एक होती हैं। ना केवल पीसीओडी बल्कि अधिकांश हार्मोनल असंतुलन से संबंधित बीमारियों के साथ ही मानसिक बीमारियां भी एक टैग हैं। अगर आप इसके कारण दैनिक जीवन की गतिविधियों में बाधा का सामना करते हैं, तो प्रोफेशनल मदद लेना सबसे अच्छा है।

वजन बढ़ना। ये वो लक्षण है, जिसके लिए आमतौर पर महिलाएं परामर्श लेना पसंद करती हैं। वजन बढ़ना सबसे सामान्य लक्षणों में से एक है। लिपिका कहती हैं, "हम देखते हैं कि लड़कियां खुद को भूखा रखती हैं, खुद से नफरत करती हैं। परिवार के लोग बुरी बातें कहते हैं, उन्हें अलग-अलग नाम से पुकारते हैं, कहते हैं कि उनसे कोई शादी नहीं करेगा। बहुत अधिक खाने के लिए उन्हें शर्म आने लगती है, चाहे फिर वो ना खा रही हों। वजन बढ़ना उनकी गलती नहीं होती है। उनके हार्मोन उनके शरीर को गलत तरीके से वसा जमा करने का कारण बन रहे होते हैं।" जितना अधिक वजन बढ़ता है, पीसीओएस उतना ही गंभीर होता जाता है। यह एक दुष्चक्र है, जिसमें कई महिलाएं फंस जाती हैं। इसे तोड़ने का एक ही तरीका है - नियमित स्वास्थ्य जांच।

पीसीओडी का निदान कैसे होगा-

पीसीओडी का इलाज क्या है? ज्यादातर मामलों में इलाज क्लिनिकल होता है। हार्मोन्स की जानकारी रखना एक सहायक कारक के रूप में कार्य कर सकता है। हालांकि यह आमतौर पर इलाज के लिए कोई शर्त नहीं होती है। ओरल ग्लूकोज टॉलिरेंस टेस्ट इंसुलिन प्रतिरोध का निदान करने में सहायता करता है, जो पीसीओडी के निदान के लिए किए जाने वाले प्रमुख पाथो-फिजियोलॉजी टेस्ट में से एक होता है। अपने मासिक धर्म चक्र पर ध्यान देने के साथ-साथ हार्मोनल संतुलन का टेस्ट भी बीमारी से ठीक करने में मदद करता है। इन लक्षणों में से कम से कम दो का दिखना भी बीमारी का प्रमुख संकेत हो सकते हैं।

  • अनियमित मासिक धर्म होना
  • एण्ड्रोजन के उच्च स्तर के लक्षण
  • सिर के बालों का पतला होना
  • एण्ड्रोजन का उच्च रक्त स्तर
  • पॉलिसिस्टिक अंडाशय

प्रजनन अंगों में द्रव्यमान, वृद्धि या अन्य असामान्यताओं की जांच के लिए एक पैल्विक टेस्ट भी होता है। रक्त, ग्लूकोज, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जांच के लिए भी कुछ टेस्ट किए जाते हैं। अंडाशय की उपस्थिति और आपके गर्भाशय की परत की मोटाई की जांच करने के लिए एक अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है। मासिक धर्म चक्र और वजन में परिवर्तन के बारे में जानकारी मिल सकती है। बालों का अधिक विकास, मुंहासे और बॉडी मास इंडेक्स की भी जांच की जाती है। अगर डॉक्टर को संदेह है कि आपको पीसीओडी है, तो वह आपको ब्लड टेस्ट कराने के लिए भी बोल सकता है। ब्लड टेस्ट का सैंपल हार्मोनल के स्तर की जांच के लिए और उन स्थितियों का पता लगाने के लिए किया जाता है, जो पीसीओडी के समान लक्षण हो सकते हैं।  अगर इनका निदान हो जाता है, तो ये कुछ चीजें हैं, जो आपको पता चल सकती हैं-

  • फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) कम हो सकता है
  • ल्यूटेनाइजिंग हार्मोन (LH) बढ़ा हुआ होता है
  • टेस्टोस्टेरोन आमतौर पर अधिक होता है
  • एस्ट्रोजन का स्तर सामान्य या अधिक हो सकता है

थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच): टीएसएच के स्तर से संकेत मिलता है कि आपको हाइपरथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म है या नहीं। यह भी पीसीओडी का लक्षण हो सकता है।

प्रोलैक्टिन: प्रोलैक्टिन का अधिक स्तर मासिक धर्म की अनियमितता और बांझपन का कारण भी बन सकता है।

अवसाद और चिंता के साथ-साथ ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की भी जांच की जा सकती है क्योंकि हार्मोनल असंतुलन मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करता है।

पीसीओडी के इलाज के लिए उपाय 

पीसीओडी का इलाज क्या है? पीसीओडी और पीसीओएस जैसी स्थितियों का कोई सटीक इलाज नहीं खोजा गया है, इसलिए इनका इलाज इनसे जुड़ी समस्याओं का इलाज करके किया जाता है। जैसे बांझपन, हिर्सुटिज्म, मुंहासे या मोटापे का इलाज करके। ऐसी दिक्कतों में ये भी शामिल हो सकते हैं-

  • ब्लड ग्लूकोज स्तर को कम करना
  • प्रजनन क्षमता को ठीक करना
  • हिर्सुटिज्म या मुंहासे का इलाज
  • नियमित मासिक धर्म होना, और एंडोमेट्रियल संबंधी परेशानियों की रोकथाम

पीसीओडी की समस्याओं में वजन कम करना (जो मुश्किल हो सकता है) मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मददगार साबित हुआ है। यहां तक कि शरीर के कुल वजन में कुछ प्रतिशत को घटाने से भी हार्मोन असंतुलन के साथ-साथ बांझपन के लक्षणों में मदद मिल सकती है।

पीसीओडी की रोकथाम के लिए जीवनशैली से जुड़े उपाय-

कॉलेज के फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाली भोपाल की सुचेता कहती हैं, "मेरा सबसे बड़ा मुद्दा वजन बढ़ना रहा है और इसपर आहार या व्यायाम से कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं उदास हो गई थी और यह बढ़ता जा रहा था। मेरे डॉक्टर ने मुझे आहार और हार्मोन थेरेपी दी। पहले कुछ महीनों के लिए वजन बहुत धीमी गति से घटा। लेकिन फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगा। एक साल में लगातार इसी तरीके को अपनाकर मैंने 15 किलो वजन कम किया। वजन घटाने से पीसीओएस की समस्या से निपटने में मदद मिली।" पीसीओएस को घर पर मैनेज करने के भी कुछ तरीके हैं।

  • संतुलित आहार लें: ऐसे आहार का सेवन करना, जिसमें विभिन्न प्रकार के ताजे फल और सब्जियां शामिल हों, उचित पोषण प्रदान करने, आपकी भूख को संतुष्ट करने और भोजन की लालसा को कम करने में मदद करे। यह एक संतुलित आहार बनाए रखने में मदद करेगा जो अतिरिक्त वजन नहीं बढ़ने देगा।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें: नियमित रूप से व्यायाम करने से आपको फिट रहने में मदद मिलती है और एक गतिहीन जीवनशैली से बचने में मदद मिलती है, जो पीसीओडी की समस्या के मुख्य कारणों में से एक हैं। पीसीओडी की समस्या के लिए पैदल चलना भी एक कारगर इलाज है। मासिक धर्म के दौरान नियमित रूप से व्यायाम करने से रक्त की आपूर्ति में वृद्धि होती है, तो मासिक धर्म की ऐंठन को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • ठीक वजन बनाए रखें: स्वस्थ वजन बनाए रखने से मधुमेह और हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है, जिसका जोखिम पीसीओडी के मरीजों को होता है।

पीसीओडी के इलाज के लिए आहार

पीसीओडी का इलाज क्या है? पीसीओडी से पीड़ित लोगों को कम वसा और कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाना चाहिए। यह आपके ब्लड शुगर के स्तर में अचानक वृद्धि को रोकेगा और आपके वजन पर नियंत्रण रखने में मदद करेगा। खाने में इन चीजों का सेवन किया जा सकता है-

  • प्राकृतिक, अनप्रोसेस्ड खाना
  • पालक, केल और अन्य पत्तेदार सब्जियां
  • उच्च फाइबर वाला भोजन
  • ब्रोकोली और फूलगोभी
  • नट और फलियां
  • मछली
  • साबुत अनाज
  • कम वसा वाले डेयरी उत्पाद

पीसीओडी के लिए कौन से व्यायाम सबसे अच्छे हैं?

अगर आप पीसीओडी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो आपकी प्राथमिक चिंता आपके बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) को कम करने की होनी चाहिए और विशेष रूप से आपके वजन या शरीर की चर्बी पर केंद्रित नहीं होनी चाहिए। ये वो विभिन्न प्रकार के व्यायाम हैं, जो आप कर सकते हैं।

  • हाई-इंटेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT)
  • कार्डियोवास्कुलर वर्कआउट
  • माइंड-बॉडी व्यायाम
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • इंटरवल ट्रेनिंग

अगर आप एक मिनट के लिए गेम खेलने वाले हैं, या 45 मिनट के लिए हाई इंटेन्सिटी में कार्डियो करने वाले हैं, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। 

पीसीओडी के साथ रहना- आउटलुक क्या है?

महिलाओं के बीच जिन विषयों पर सबसे अधिक चर्चा होती है, उनमें पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग (पीसीओडी) सबपर हावी रहता है। इसके लक्षण और जटिलताएं एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती हैं।

  • जागरूकता की कमी: पीसीओएस समस्याओं से पीड़ित लोगों में जागरूकता की कमी रहती है। यह बेशक एक कष्टदायक अनुभव हो सकता है। लेकिन लगातार प्रयास से कोई भी बीमारी का प्रबंधन कर सकता है और इसे नियंत्रित कर सकता है। समान लक्षण दिखने पर भी अधिकांश लोग पीसीओडी को लेकर खुली बातचीत करने में दिक्कतों का सामना करते हैं। समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य को टैबू मान लेने के कारण जागरूकता की कमी रहती है और बीमारी का इलाज नहीं हो पाता। ऐसे में खुली चर्चा करने और इसके बारे में खुद को शिक्षित करने में सक्षम होना चाहिए। इसमें पीसीओडी की समस्या के कारण, पीसीओडी की समस्या का समाधान, इलाज का तरीका और महिलाओं में पीसीओडी की समस्या के कारण और लक्षण के बारे में चर्चा शामिल है।
  • सामाजिक टैबू: अतीत से चल रहे सामाजिक टैबू को दूर करने की जरूरत है। इसका मतलब ये कि पीसीओडी के बारे में खुली बातचीत करना जरूरी है। अगर ऐसा ना हो तो, यह ना केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि इससे गुजरने वालों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसा करते समय अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए पर्याप्त उपाय करना भी उतना ही जरूरी है। उचित निदान के बाद उपचार करने के उपाय अपनाए जाने चाहिए।
  • फिट रहें: उपचार लेने और दवाओं के साथ-साथ फिट रहना भी बहुत महत्वपूर्ण है। व्यायाम करना और स्वस्थ भोजन करना ही उपचार का सबसे सफल उपाय हो सकता है। अपने आहार में फलों और सब्जियों को शामिल करना बेहतर होने की दिशा में एक प्रमुख कदम है।
  • गलत आदतों को दूर करें: शराब और सिगरेट से बचना या इन्हें सीमित करना सही दिशा में एक और कदम है।
  • नींद पूरी करें: नींद पूरी करना भी जरूरी होता है। इसके साथ ही उपाय के लिए सही तरीके से इलाज करना और आहार का सही चुनाव करना जरूरी है।
  • मदद लें: पीसीओडी का सामना करते हुए मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कतों से निपटने के लिए प्रोफेशनल मदद लेना भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे बांझपन, सामाजिक टैबू, मूड स्विंग्स और इस तरह के अन्य लक्षणों से लड़ने में मदद मिलेगी।
  • हेवी फ्लो वाले पैड का इस्तेमाल करें: पीसीओएस के मरीज अपने लिए रियो पैड जैसे हैवी फ्लो पैड इस्तेमाल कर सकते हैं। रियो हैवी फ्लो पैड मोटे और लंबे होते हैं और नियमित पैड की तरह रक्त की मात्रा से 3 गुना अधिक अवशोषित करते हैं। उनके पास दोहरे विंग्स और साइड फ्लो-लॉक गार्ड होते हैं, जो रक्त को अंदर रखते हैं और किसी भी प्रकार की लीकेज से बचाते हैं। पीसीओएस मरीजों के सामने सबसे बड़ी चिंताओं में से एक हैवी फ्लो होता है। इसलिए इससे जुड़ी इमरजेंसी की स्थितियों में रियो हेवी फ्लो पैड या ऐसे विशेष प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है। पीसीओडी का कोई स्पष्ट कारण या सटीक इलाज नहीं है, लेकिन किसी को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। पीसीओडी का जल्द निदान करने से लक्षणों से राहत मिलती है। पीसीओडी के इलाज से आपको अपनी स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों को प्रबंधित करने में मदद मिलती है, जिसमें बांझपन, हिर्सुटिज्म, मुंहासे, अपरिपक्व कोप, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं शामिल हैं। हालांकि कुछ उपचारों में जीवनशैली में बदलाव या दवा शामिल हो सकती हैं। निदान करना और अपने इलाज के लिए सही प्लानिंग अपनाना इस प्रक्रिया की तरफ पहला कदम है। आखिर में हम यही कहना चाहेंगे कि पीसीओडी से जुड़े टैबू के बावजूद अपने शारीरिक और मानसिक कल्याण की दिशा में काम करना ही सबसे अधिक आवश्यक है।

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